devotement, समर्पण

समर्पण हमारे जीवन का आधार है समर्पण परमात्मा के प्रति हो अपने माता-पिता के प्रति हो, अपने कर्म के प्रति हो, अथवा अपने जीवन के प्रति। जहां पर मन के भाव आपकी ऊर्जा आपका सामर्थ पूर्णतः समर्पित हो जाए तब आप अपने आप को योग्य समझ सकते हैं।

Life , जीवन क्या है

जीवन ईश्वर के द्वारा दिया हुआ एक ऐसा वरदान है जो हमेशा हमें यह ज्ञात करवाता है, कि आप क्या है और आप क्या कर सकते हैं ,आपको क्या करना चाहिए। यह जीवन हमेशा हमें सिखाता है किस प्रकार से समय के साथ , समय के अनुरूप और समय के महत्व को समझकर के चलनापढ़ना जारी रखें "Life , जीवन क्या है"

Sadguru , सद्गुरु

सद्गुरु का तात्पर्य होता है सच्चा गुरु, सद् शब्द का तात्पर्य होता है अच्छा ,सत्कर्मी, सनातनी। गुरु का तात्पर्य होता है ज्ञान देने वाला प्रकाश देने वाला जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये वह गुरु होता है गु का अर्थ है अंधकार रू का अर्थ होता है प्रकाश अर्थात अंधकार से प्रकाश कीपढ़ना जारी रखें "Sadguru , सद्गुरु"

पूजा क्या है ? What is worship

पूजा! अपने उस व्यक्ति, वस्तु ,प्राकृतिक संपदा तथा परमात्मा की सेवा करने का, आदर करने का, respect करने का भाव है पूजा l पूजा शब्द का हम लोग ज्यादातर प्रयोग भगवान की आराधना में करते हैं कहा जाता है भगवान की पूजा है पूजा अर्थात श्रेष्ठ का सम्मान करने की विधि को पूजा कहा जातापढ़ना जारी रखें "पूजा क्या है ? What is worship"

योग — Yog

योग दो प्रकार का होता है प्रथम आंतरिक दूसरा शारीरिक योग l शारीरिक योग कई माध्यमों से किया जाने वाला जैसे प्राणायाम एवं अन्य योगासन आंतरिक योग जोकि पूर्ण रूप से परमात्मा के सन्निकट पहुंचने हेतु प्रयत्न करना अंतर योग माना जाता है l जिसने अध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त की वह आंतरिक योग अर्थात परमात्मा सेपढ़ना जारी रखें "योग — Yog"

श्राद्ध

पितरों के उद्देश्य से विधिपूर्वक जो कर्म श्रद्धा से किया जाता है उसे श्राद्ध कहते हैं श्रद्धया पितृन् उद्दिश्य विधिना क्रियते यत् कर्म तत् श्राद्धम् श्रद्धा से ही से ही श्राद्ध शब्द की निष्पत्ति होती है। श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम् आदि अनेक ऐसे प्रमाण हैं जोकि धर्मशास्त्रों में श्राद्ध के प्रतिरूप में बताया जातापढ़ना जारी रखें "श्राद्ध"

Moksha – मोक्ष

मोक्ष क्या है ? मोक्ष शब्द सुनते ही मन में, लोगों में यह धारणा उत्पन्न होती है कि मृत्यु के बाद कोई ऐसा राज सिंहासन ,कोई ऐसा दिव्य स्थल ,कोई ऐसी दिव्य व्यवस्था ,कोई ऐसा दिव्य भोग मिलेगा जिसमें सब सुख ! हर प्रकार की सुविधाएं! हर प्रकार का विलास उत्पन्न हो! सामान्य से जीवनपढ़ना जारी रखें "Moksha – मोक्ष"

धर्म

धर्मेण हन्यते व्याधि धर्मेण हन्यते ग्रहाः।धर्मेण हन्यते शत्रून् यतो धर्मस्ततो जयः।। धर्म करने से संपूर्ण प्रकार के क्लेश, दुख ,दोष का निवारण होता है धर्म ही एक ऐसा साधन है जिससे मनुष्य स्वयं और अपने संपूर्ण बंधु बांधवों के कष्टों का निवारण करने में समर्थ होता है धर्म करने से रोग की शांति होती हैपढ़ना जारी रखें "धर्म"

Satya , सत्य

सत्कर्म करने के हेतु अच्छा कर्म करने के हेतु जीवन में सदैव उत्तमता आने के हेतु सत्य का पालन करना परम धर्म होता है सत्य अर्थात जीवन में सदैव सत्कर्म करने का संकल्प लेना जीवन की वह अच्छाई जिसके माध्यम से संपूर्ण समाज का हित हो संपूर्ण लोक का कल्याण हो और धर्म युक्त होतेपढ़ना जारी रखें "Satya , सत्य"

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