गया श्राद्ध या ब्रह्म कपाल के बाद श्राद्ध करें या नहीं ?

।। ॐ पितृ देवाय नमः ।। गया श्राद्ध के बाद यह गलती बिल्कुल न करें, शास्त्रों में है स्पष्ट संकेत। ब्रह्मकपाली के बाद गया में पिण्डदान क्यों बताया गया है निषिद्ध? गया या ब्रह्मकपाली:= पितृश्राद्ध में सही क्रम क्या है? क्या गया श्राद्ध के बाद पितृपक्ष का श्राद्ध बंद कर देना चाहिए? जानिए सत्य। गयापढ़नापढ़ना जारी रखें “गया श्राद्ध या ब्रह्म कपाल के बाद श्राद्ध करें या नहीं ?”

पितृ पक्ष

🌷 पितरों का परिचय, महत्व, कर्म एवं विधान।(ऋग्वेद, महाभारत, मनुस्मृति, गरुड़पुराण, विष्णुपुराण,स्कंदपुराण, वायुपुराण आदि के आधार पर विवरण)🍁1. पितरों का परिचय‘पितृ’ शब्द संस्कृत के ‘पिता’ से निष्पन्न है, जिसका अर्थ पूर्वज या पिता-पितामह आदि है।शास्त्रों में पितर दो प्रकार के माने गए हैं—व्यक्तिगत पितर (व्यक्ति विशेष के दिवंगत पिता, पितामह, प्रपितामह आदि)सार्वभौम पितर (मनुष्य जातिपढ़नापढ़ना जारी रखें “पितृ पक्ष”

कदलीफल (केला) श्राद्ध में वर्जित या उपयोगी

।।श्राद्ध में केला चढ़ाने पर विचार।। श्राद्धकर्ममें #केलाका #महत्त्व…………. सम्मान्य धर्मनिष्ठ मित्रामित्रो! आज मैं श्राद्धकर्म में केला के प्राशस्त्याप्राशस्त्य पर चर्चा कर रहा हूँ। शास्त्ररूप कल्पवृक्ष में देश, काल, पात्र, परिस्थिति और शाखादि के भेद से विविध प्रकार के वचन प्राप्त हो जाते हैं; जिनकी सङ्गति लगानी चाहिए। फेसबुक के कई विद्वानों एवम् अविद्वानों नेपढ़नापढ़ना जारी रखें “कदलीफल (केला) श्राद्ध में वर्जित या उपयोगी”

दीक्षा

दीक्षा देने का अधिकार किस को है कि हमारे शास्त्र कहते हैं—दीक्षा (दीक्षा ग्रहण) में गुरु की योग्यता, परीक्षा और अधिकार का विषय तंत्र, आगम और धर्मशास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है। इसे सरल लेकिन प्रमाण सहित समझिए: 🔱 1. क्या दीक्षा से पहले गुरु को परखना आवश्यक है? हाँ, शास्त्रों में गुरु-परीक्षापढ़नापढ़ना जारी रखें “दीक्षा”

शिव और भारतीय वैदिक विज्ञान

क्या शिवलिंग रेडिएटर हैं? हाँ 100% सच!! भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठाएं, हैरान रह जाएंगे आप! भारत सरकार की परमाणु भट्टी के बिना सभी ज्योतिर्लिंग स्थलों में सर्वाधिक विकिरण पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं परमाणु भट्टे हैं, इसीलिए उन पर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वे शांत रहें। महादेव के सभी पसंदीदापढ़नापढ़ना जारी रखें “शिव और भारतीय वैदिक विज्ञान”

यज्ञोपवीत धारण करने की विधि.सर्वप्रथम जानना जरुरी है की जनेऊ कितनी लम्बी होनी चाहिए यह बहुत जरुरी आवश्यक है |कात्यायन के अनुसार यज्ञोपवीत कमर तक ( कटि भाग ) तक होनी चाहिए |यज्ञोपवीत अधिक लम्बी नहीं होनी चाहिए |वशिष्ठ के अनुसार नाभि के ऊपर यज्ञोपवीत होने से अर्थात बहुत छोटी यज्ञोपवीत होने से आयुनाश होता है |

नाभि के निचे होने से तपबल क्षय होता है |अतः सदैव यज्ञोपवीत नाभि के समान अर्थात नाभि के बराबर मात्रा में धारण करनी चाहिए | यज्ञोपवीत धारण करने की सामग्री :यज्ञोपवीत नाभि के बराबर – 1 अक्षत – एक छोटी कटोरी भरकरचन्दन टिका लगाने के लिए यज्ञोपवीत धारण करने का क्रम : आचमनप्राणायामसङ्कल्प यज्ञोपवीत प्रक्षालनहाथोपढ़नापढ़ना जारी रखें “यज्ञोपवीत धारण करने की विधि.सर्वप्रथम जानना जरुरी है की जनेऊ कितनी लम्बी होनी चाहिए यह बहुत जरुरी आवश्यक है |कात्यायन के अनुसार यज्ञोपवीत कमर तक ( कटि भाग ) तक होनी चाहिए |यज्ञोपवीत अधिक लम्बी नहीं होनी चाहिए |वशिष्ठ के अनुसार नाभि के ऊपर यज्ञोपवीत होने से अर्थात बहुत छोटी यज्ञोपवीत होने से आयुनाश होता है |”

अगरबत्ती और बांस जलाना शास्त्र निषिद्ध है

वंसवृद्धिकरो वंसः,तज्ज्वलनं पितृदोषकृत्।न तस्य ज्वलनं कार्यमिति शास्त्रेषु सम्मतम्।।शास्त्रों में कथन है कि बांस या बम्बू वंशवृद्धि कर काष्ठ है ।इसके जलानें से पितर रुष्ट हो जाते है ।इसीलिए इसे न तो श्मशान में जलाया जाता है ।न ही समिधा हेतु ही यज्ञ में प्रयुक्त किया जाता है। जिससे प्रत्यक्ष नही वरन् परम्परया यह आभास होतापढ़नापढ़ना जारी रखें “अगरबत्ती और बांस जलाना शास्त्र निषिद्ध है”

श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2025

शंका समाधानहृषीकेश पंचांग वाराणसी श्रीकृष्णजन्माष्टमी व्रत 16/08/2025 शनिवार को होगा। इस वर्ष अष्टमी तिथि शुक्रवार को पूरे दिन व्यतीत करके मध्य रात्रि 12:58am से आरम्भ हो रही है जो की शनिवार को रात्रि 10:29pm तक रहेगी अतः उदयक़ालीन तिथि जो की रात्रि को भी भोग कर रही है वही जन्माष्टमी स्मार्त हेतु मान्य होगी ।पढ़नापढ़ना जारी रखें “श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2025”

यज्ञोपवीत

जनेऊ संस्कार का महत्व:यह अति आवश्यक है कि हर परिवार धार्मिक संस्कारों को महत्व देवें, घर में बड़े बुजर्गों का आदर व आज्ञा का पालन हो, अभिभावक बच्चों के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह समय पर करते रहे। धर्मानुसार आचरण करने से सदाचार, सद्‌बुद्धि, नीति-मर्यादा, सही – गलत का ज्ञान प्राप्त होता है और घरपढ़नापढ़ना जारी रखें “यज्ञोपवीत”

जानकारी अनिवार्य है

विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियों द्वारा किया गया अनुसंधान) ■ काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग■ 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग■ 2 त्रुटि = 1 लव ,■ 1 लव = 1 क्षण■ 30 क्षण = 1 विपल ,■ 60 विपल = 1 पल■ 60 पलपढ़नापढ़ना जारी रखें “जानकारी अनिवार्य है”

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