दीक्षा

दीक्षा देने का अधिकार किस को है कि हमारे शास्त्र कहते हैं—दीक्षा (दीक्षा ग्रहण) में गुरु की योग्यता, परीक्षा और अधिकार का विषय तंत्र, आगम और धर्मशास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है। इसे सरल लेकिन प्रमाण सहित समझिए: 🔱 1. क्या दीक्षा से पहले गुरु को परखना आवश्यक है? हाँ, शास्त्रों में गुरु-परीक्षापढ़ना जारी रखें "दीक्षा"

शिव और भारतीय वैदिक विज्ञान

क्या शिवलिंग रेडिएटर हैं? हाँ 100% सच!! भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठाएं, हैरान रह जाएंगे आप! भारत सरकार की परमाणु भट्टी के बिना सभी ज्योतिर्लिंग स्थलों में सर्वाधिक विकिरण पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं परमाणु भट्टे हैं, इसीलिए उन पर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वे शांत रहें। महादेव के सभी पसंदीदापढ़ना जारी रखें "शिव और भारतीय वैदिक विज्ञान"

यज्ञोपवीत धारण करने की विधि.सर्वप्रथम जानना जरुरी है की जनेऊ कितनी लम्बी होनी चाहिए यह बहुत जरुरी आवश्यक है |कात्यायन के अनुसार यज्ञोपवीत कमर तक ( कटि भाग ) तक होनी चाहिए |यज्ञोपवीत अधिक लम्बी नहीं होनी चाहिए |वशिष्ठ के अनुसार नाभि के ऊपर यज्ञोपवीत होने से अर्थात बहुत छोटी यज्ञोपवीत होने से आयुनाश होता है |

नाभि के निचे होने से तपबल क्षय होता है |अतः सदैव यज्ञोपवीत नाभि के समान अर्थात नाभि के बराबर मात्रा में धारण करनी चाहिए | यज्ञोपवीत धारण करने की सामग्री :यज्ञोपवीत नाभि के बराबर - 1 अक्षत - एक छोटी कटोरी भरकरचन्दन टिका लगाने के लिए यज्ञोपवीत धारण करने का क्रम : आचमनप्राणायामसङ्कल्प यज्ञोपवीत प्रक्षालनहाथोपढ़ना जारी रखें "यज्ञोपवीत धारण करने की विधि.सर्वप्रथम जानना जरुरी है की जनेऊ कितनी लम्बी होनी चाहिए यह बहुत जरुरी आवश्यक है |कात्यायन के अनुसार यज्ञोपवीत कमर तक ( कटि भाग ) तक होनी चाहिए |यज्ञोपवीत अधिक लम्बी नहीं होनी चाहिए |वशिष्ठ के अनुसार नाभि के ऊपर यज्ञोपवीत होने से अर्थात बहुत छोटी यज्ञोपवीत होने से आयुनाश होता है |"

अगरबत्ती और बांस जलाना शास्त्र निषिद्ध है

वंसवृद्धिकरो वंसः,तज्ज्वलनं पितृदोषकृत्।न तस्य ज्वलनं कार्यमिति शास्त्रेषु सम्मतम्।।शास्त्रों में कथन है कि बांस या बम्बू वंशवृद्धि कर काष्ठ है ।इसके जलानें से पितर रुष्ट हो जाते है ।इसीलिए इसे न तो श्मशान में जलाया जाता है ।न ही समिधा हेतु ही यज्ञ में प्रयुक्त किया जाता है। जिससे प्रत्यक्ष नही वरन् परम्परया यह आभास होतापढ़ना जारी रखें "अगरबत्ती और बांस जलाना शास्त्र निषिद्ध है"

श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2025

शंका समाधानहृषीकेश पंचांग वाराणसी श्रीकृष्णजन्माष्टमी व्रत 16/08/2025 शनिवार को होगा। इस वर्ष अष्टमी तिथि शुक्रवार को पूरे दिन व्यतीत करके मध्य रात्रि 12:58am से आरम्भ हो रही है जो की शनिवार को रात्रि 10:29pm तक रहेगी अतः उदयक़ालीन तिथि जो की रात्रि को भी भोग कर रही है वही जन्माष्टमी स्मार्त हेतु मान्य होगी ।पढ़ना जारी रखें "श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2025"

यज्ञोपवीत

जनेऊ संस्कार का महत्व:यह अति आवश्यक है कि हर परिवार धार्मिक संस्कारों को महत्व देवें, घर में बड़े बुजर्गों का आदर व आज्ञा का पालन हो, अभिभावक बच्चों के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह समय पर करते रहे। धर्मानुसार आचरण करने से सदाचार, सद्‌बुद्धि, नीति-मर्यादा, सही – गलत का ज्ञान प्राप्त होता है और घरपढ़ना जारी रखें "यज्ञोपवीत"

जानकारी अनिवार्य है

विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियों द्वारा किया गया अनुसंधान) ■ काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग■ 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग■ 2 त्रुटि = 1 लव ,■ 1 लव = 1 क्षण■ 30 क्षण = 1 विपल ,■ 60 विपल = 1 पल■ 60 पलपढ़ना जारी रखें "जानकारी अनिवार्य है"

पितृ पक्ष में क्या कैसे करें

पितृ तर्पण विशेषपितृ तर्पण के क्रियात्मक पक्ष से अवगत हों और जो लोग तर्पणाधिकारी हैं(जिनके पिता नहीं हैं) वे अवश्य तर्पण करें।यदि कोई गया श्राद्ध,पुष्कर श्राद्ध और बद्रीनाथ ब्रह्मपाली में श्राद्ध कर लिए हैं वो भी तर्पण अवश्य करें।जितने पुत्र हैं सभी को तर्पण अवश्य करना चाहिए।संध्योपासन के बाद तर्पणाधिकारी को तर्पण करना चाहिए।शास्त्रों मेंपढ़ना जारी रखें "पितृ पक्ष में क्या कैसे करें"

जीवित्पुत्रिका व्रत

माताएं अपनी संतान के लिए सालभर में कई व्रत करती हैं जिसमें से एक है जीवित्पुत्रिका व्रत. इसे जितिया (Jitiya vrat) या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है. आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाता है. संतान की लंबी उम्र और सेहत बनाए रखने के लिएपढ़ना जारी रखें "जीवित्पुत्रिका व्रत"

मंत्र शक्ति की ऊर्जा

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में एक प्राचीन ग्रंथ था, जिसे 'मंत्र शक्ति की ऊर्जा' कहा जाता था। यह ग्रंथ अद्भुत शक्तियों का स्रोत माना जाता था, लेकिन इसके रहस्यों को समझना आसान नहीं था। गाँव के लोग इस ग्रंथ से डरते थे, क्योंकि कहा जाता था कि जो भी इसकापढ़ना जारी रखें "मंत्र शक्ति की ऊर्जा"

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें