आध्यात्मिक प्रेरणा

गहरी रात थी, जब राधिका ने अपने सपने में एक अजीब सी आवाज सुनी। वह आवाज उसे एक पुराने मंदिर की ओर बुला रही थी। राधिका, जो एक जिज्ञासु और साहसी युवा महिला थी, ने सोचा कि यह केवल एक सपना है। लेकिन जब सुबह हुई, तो उसकी आँखों के सामने वही मंदिर का चित्रपढ़ना जारी रखें "आध्यात्मिक प्रेरणा"

प्राचीन भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय

प्राचीन भारत में शिक्षा और ज्ञान का एक विशाल इतिहास है। हमारे प्राचीन भारत के 25 प्राचीन विश्वविद्यालय… दुनिया भर से हजारों प्रोफेसर और लाखों छात्र यहां रहते थे और कई विज्ञानों और विषयों का अध्ययन और अध्यापन करते थे। यहाँ पर कुछ प्रमुख प्राचीन विश्वविद्यालयों की जानकारी दी जा रही है: 1.नालंदा विश्वविद्यालय (Nalandaपढ़ना जारी रखें "प्राचीन भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय"

वैवाहिक रीतियों का वास्तविक महत्व

विवाह में सात फेरे ही क्यों लेते हैं? आखिर हिन्दू विवाह के समय अग्नि के समक्ष सात फेरे ही क्यों लेते हैं? दूसरा यह कि क्या फेरे लेना जरूरी है? पाणिग्रहण का अर्थ : - पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से 'विवाह' के नाम से जाना जाता है। वर द्वारा नियम और वचन स्वीकारोक्ति केपढ़ना जारी रखें "वैवाहिक रीतियों का वास्तविक महत्व"

स्वस्तिक का महत्व

हर शुभ कार्य से पहले क्यों बनाया जाता है स्वास्तिक? जानिए इसका कारण और रहस्य… स्वास्तिक को प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में अच्छाई और शुभता का प्रतीक माना जाता रहा है। हिन्दू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले स्वास्तिक का चिन्ह जरूर बनाया जाता है। स्वस्तिक शब्द सु+अस+क शब्दों सेपढ़ना जारी रखें "स्वस्तिक का महत्व"

वास्तु दोष निवारण कैसे करें

जानिए की किस मन्त्र के जाप से किस दिशा का होगा वास्तु दोष( प्रभाव )दूर या कम〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰आजकल शायद ही कोई ऐसा घर हो जो वास्तु दोष से मुक्त हो। वास्तु दोष का प्रभाव कई बार देर से होता है तो कई बार इसका प्रभाव शीघ्र असर दिखने लगता है।इसका कारण यह है कि सभी दिशाएंपढ़ना जारी रखें "वास्तु दोष निवारण कैसे करें"

मृत्यु के 14 प्रकार

राम-रावण युद्ध चल रहा था, तब अंगद ने रावण से कहा:- तू तो मरा हुआ है, मरे हुए को मारने से क्या फायदा ?रावण बोला:– मैं जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे ?अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वालों को जीवित नहीं कहते साँस तो लुहार की धौंकनी भी लेती है। तब अंगद ने मृत्यु के 14पढ़ना जारी रखें "मृत्यु के 14 प्रकार"

सप्त नद्याः

ऋग्वेद की नदीस्तुति में 7 नदियों का वर्णन मिलता है : सिन्धु, सरस्वती, वितस्ता (झेलम), शुतुद्रि (सतलुज), विपाशा (व्यास), परुषिणी (रावी) और अस्किनी (चेनाब) यह सब नदियां हिमालय खंड से निकलती है , (सरस्वती को छोड़ कर जो अब नहीं है ) सतलुज व्यास रावी और चिनाब हिमाचल प्रदेश से होकर जाती है। ऋग्वेद मेंपढ़ना जारी रखें "सप्त नद्याः"

अंगों और तिल का प्रभाव

शरीर के विभिन्न अंगों पर तिलों का फलभारतीय ज्योतिष में सामुद्रिक शास्त्र में शरीर के विभिन्न अंगों पर पाए जाने वाले तिलों का सामान्य फल इस प्रकार है। १- ललाट पर तिल – ललाट के मध्य भाग में तिल निर्मल प्रेम की निशानी है। ललाट के दाहिने तरफ का तिल किसी विषय विशेष में निपुणता,पढ़ना जारी रखें "अंगों और तिल का प्रभाव"

गरुण वृक्ष की विशेषता

प्रकृति ने हमे कई उपहार दिए हैं उनमें से एक गरुड़ वृक्ष भी हैं…. गरुड़ की फलियाँ बिलकुल साँप के आकर के दिखाई देती हैं,शायद इसी कारण इसका नाम गरुड़ पड़ा होगा… ग्रामीणांचल में आज भी दरवाजे के ऊपर गरुड़ की फलियों को बांध देते है ताकि किसी भी प्रकार का साँप घर में नहींपढ़ना जारी रखें "गरुण वृक्ष की विशेषता"

तीज व्रत विशेष

हरितालिका तीज (गौरी तृतीया) व्रत—- हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं। कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा गयापढ़ना जारी रखें "तीज व्रत विशेष"

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