दोषारोपण

किसी को दोष देना मूर्खता है । मेरे पास अपने खुद की सीमाओं को ही पार करने की मुसीबत काफी है और हमें इस बात पर सिर नहीं पीटना चाहिए कि ईश्वर ने बुद्धि का उपहार सबको एक जैसा नहीं दिया है । हमसे ढेरों गलतियां होती हैं तब भी जा कर के हम शायदपढ़नापढ़ना जारी रखें “दोषारोपण”

क्या “जातिवाद” पतन का कारण ?

नमस्कार मित्रों! आज हम जातिवाद भेदभाव पर विचार करेंगे । जाति का किसी भी प्रकार से हमारे प्राचीन सभ्यता में कहीं कोई औचित्य नहीं रहा है । जाति का यदि विचार किया जाए तो जाति हम-आपने कुछ समय से बनाया हुआ है और उसी के आधार पर भेदभाव भी किया जाता है । हां! वर्णपढ़नापढ़ना जारी रखें “क्या “जातिवाद” पतन का कारण ?”

शिक्षा का महत्व

कभी विचार किया है कि जब बच्चों की फीस 12 माह की जमा करते हैं तो अध्यापकों को 10 माह का वेतन क्यो देते स्कूल प्रबंधन? कभी विचार किया है कि जब शिक्षा भारत में ब्यवसाय नहीं है तो शिक्षा का बाज़ारूकरण क्यो हो रहा है? कभी सोचा है कि जिस ब्यवस्था पर आज तकपढ़नापढ़ना जारी रखें “शिक्षा का महत्व”

लोग आपसे क्या चाहते हैं ?

क्या आपने कभी ऐसा सोचा है- कि बहस खत्म कर दें। दुर्भावना समाप्त कर दें। प्रेम बढ़ा दें। सद्भाव कायम कर दें। सामने वाले व्यक्ति को आपकी बात ध्यान से सुनने पर विवश कर दें । यदि नहीं ! तो सुनिए वह वाक्य यह है कि “मैं आपको बिल्कुल भी दोषी नहीं मानता, अगर मैंपढ़नापढ़ना जारी रखें “लोग आपसे क्या चाहते हैं ?”

सुकरात के रहस्य? स्वीकृति ।

लोगों से बात शुरू करते समय आप अपने मतभेदों का जिक्र सबसे पहले ना करें । आप पहले उन बातों पर जोड़ दीजिए और जोड़ते रहिए जिन पर आप दोनों सहमत हों । यदि संभव हो तो इस बात पर जोर दीजिए कि आप दोनों का लक्ष्य एक ही है । और आप में अंतरपढ़नापढ़ना जारी रखें “सुकरात के रहस्य? स्वीकृति ।”

मृत्यु सबको आती है

मृत्यु कोई शब्द नही बल्कि, हिन्दू धर्म के महाभारत ग्रन्थ के अनुसार, मृत्यु एक परम पवित्र मंगलकारी देवी है। सामान्य भाषा मे किसी भी जीवात्मा अर्थात प्राणी के जीवन के अन्त को मृत्यु कहते हैं। मृत्यु सामान्यतः वृद्धावस्था, लालच, मोह,रोग,, कुपोषण के परिणामस्वरूप होती है। मुख्यतया मृत्यु के 101 स्वरूप होते है, लेकिन मुख्य 8 प्रकार की होती है। जिसमे बुढ़ापा,पढ़नापढ़ना जारी रखें “मृत्यु सबको आती है”

क्या चिंता करना ठीक है?

भविष्य अनिश्चित है, डरावना है, छिपा हुआ है । अगर हम समय-समय पर चीजों के बारे में चिंता ना करें तो हम इंसान नहीं हैं । हम अपनी सेहत अपने माता-पिता या बच्चों या दोस्तों, अपने संबंधों, अपने कामकाज और अपने खर्च के बारे में चिंता करते हैं। हम चिंता करते हैं कि हम ज्यादापढ़नापढ़ना जारी रखें “क्या चिंता करना ठीक है?”

दीपावली , Deepawali

दीपावली उत्साह का पर्व है, ज्ञान का पर्व है, प्रकाश का पर्व है। ऐसा प्रकाश जो समाज में जब फैले तो पूरे संसार को प्रकाशित कर दे, ऐसा उत्साह जो घर से लेकर के बाहर तक आनंदित कर दे, ऐसा ज्ञान जो स्वयं से लेकर के संपूर्ण संसार को ज्ञानी बना दे, अज्ञानता को दूरपढ़नापढ़ना जारी रखें “दीपावली , Deepawali”

मुस्कुराहट , Smile

मुस्कुराहट! कितना सुंदर शब्द है । मुस्कुराहट मतलब अपनी प्रसन्नता को प्रदर्शित करने का एक जरिया। जहां खुश होते हैं, प्रसन्न होते हैं, आनंदित होते हैं तो मुस्कुरा देते हैं । मुस्कुराहट वह स्वीकृति – जो आप हृदय से देने का प्रयत्न करते हैं। मुस्कुराहट दो प्रकार से होती है एक दिखावा जो कि हमपढ़नापढ़ना जारी रखें “मुस्कुराहट , Smile”

सम्मान respect

हमारी हमेशा इच्छा रहती है कि कोई हमारा सम्मान करें हमारी respect करे। लेकिन क्या यह हमारे सोचने से संभव है! शायद नहीं! क्योंकि सम्मान या respect एक ऐसा प्रतिबिंब है जो कि आप जैसे- दर्पण के सामने खड़े होते हैं और आप उससे अपेक्षा करते हैं कि जैसे आपकी इच्छा हो या जैसे आपकीपढ़नापढ़ना जारी रखें “सम्मान respect”

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