कई बार आप दूसरों को इस बारे में बताना चाहेंगे कि आप क्या कर रहे हैं, क्योंकि जाहिर है आप किसी को अपने दिल की बात बताना चाहते हैं । लेकिन देखिए, आप को नहीं बताना चाहिए और आप नहीं बताए तो आपके लिए ही अच्छा होगा । उन्हें यह बात खुद मालूम करने देंपढ़नापढ़ना जारी रखें “अधिक बोलना भी मूर्खता”
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मैं बीमार हूं ?
अवश्य! मैं बीमार हूं । हम सब बीमार हैं । प्रत्येक वह व्यक्ति बीमार है जो अपने आत्मबल को मजबूत नहीं कर पा रहा । अपने आत्मविश्वास को बढ़ा नहीं पा रहा । स्वयं को मजबूत नहीं कर पा रहा वह हर व्यक्ति बीमार है और बहुत बीमार है । यदि हम किसी भी समस्यापढ़नापढ़ना जारी रखें “मैं बीमार हूं ?”
बस! एक कदम और
असफलता के सबसे सामान्य कारणों में से एक अस्थाई हार द्वारा पैदा होने वाली अड़चन के कारण भाग खड़े होने की आदत है। हर व्यक्ति कभी न कभी इस गलती का दोषी होता है । हम सब में एक सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि हम अपने लक्ष्य पर पहुंचने के कुछ ही पहलेपढ़नापढ़ना जारी रखें “बस! एक कदम और”
बिनु सत्संग विवेक न होई
सत् अर्थात सुन्दर । संग अर्थात संगति । अर्थात अच्छे लोगों का साथ करना । गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है बिना सत्संग के बुद्धि प्रखर नहीं होती । सत्संग अर्थात अच्छे लोगों की संगति करना । शुद्ध लोगों की संगति करना । सात्विक लोगों की संगति करना । सत्संग से मानसिकता शुद्ध हो जातीपढ़नापढ़ना जारी रखें “बिनु सत्संग विवेक न होई”
प्रार्थना की परिभाषा
नमस्कार! प्रार्थना अर्थात निवेदन । किसी श्रेष्ठ के सम्मुख प्रस्तुत होकर अपने यथोचित कल्याण हेतु आर्त भाव से निवेदन करना ही प्रार्थना होती है । कभी भी निवेदन केवल योग्य के सन्मुख ही करना चाहिए अन्यथा असफलता ही प्राप्त होती है । इस सृष्टि का अपितु पूरे ब्रम्हांड के लिए प्रार्थना का एक ही स्थानपढ़नापढ़ना जारी रखें “प्रार्थना की परिभाषा”
पतन & उत्थान ?
नमस्कार! आज मनुष्य अपने कर्मों के कारण पतन को प्राप्त कर रहा है । पतन अर्थात निकृष्ट कर्म के प्रतिफल । जो कर्म धर्म के अनुकूल ना हो, समाज के अनुकूल ना हो, वह निकृष्ट कर्म होता है । अनैतिक कर्म होता है । और उस अनैतिक कर्म का जो परिणाम होता है वह पतनपढ़नापढ़ना जारी रखें “पतन & उत्थान ?”
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“समस्याएं” सब के साथ होती हैं !
समस्या सब के साथ होती है । विश्व के अधिकांश मनुष्यों के साथ बहुत सी समस्या होती है । जैसे शारीरिक , मानसिक , आर्थिक , सामाजिक , भौतिक आदि । ऐसी स्थिति में सभी यही चाहते हैं कि समस्या का समाधान हो । परंतु मनोनुकूल समाधान त्वरित संभव हो ऐसा होना मुश्किल होता हैपढ़नापढ़ना जारी रखें ““समस्याएं” सब के साथ होती हैं !”
और पास कैसे आए ?
एक राजा था । वह अत्यधिक व्यस्त रहता था। फिर भी वह अपनी प्रजा के प्रति बहुत ही तत्पर रहता था । वह प्रयास करता था कि अपनी प्रजा की कोई भी ऐसी समस्या ना हो जिससे कि उसकी प्रजा को दुख अथवा समस्या की प्राप्ति हो । वह प्रयास करता था की प्रजा सेपढ़नापढ़ना जारी रखें “और पास कैसे आए ?”
पिता ?
पिता शब्द स्वयं में एक स्तम्भ है, आधार है, एक ऐसी नींव है जिसका नाम आते ही संतान के मनोबल में पूर्णरूपेण प्रबलता आती हैं । पिता अपनी संतान की एक ऐसी अपेक्षा होती है, जिस पर संतान को गर्व होता है । संतान पिता के मार्ग पर चलने का प्रयत्न करता है। या ऐसापढ़नापढ़ना जारी रखें “पिता ?”