जानिए की किस मन्त्र के जाप से किस दिशा का होगा वास्तु दोष( प्रभाव )दूर या कम〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰आजकल शायद ही कोई ऐसा घर हो जो वास्तु दोष से मुक्त हो। वास्तु दोष का प्रभाव कई बार देर से होता है तो कई बार इसका प्रभाव शीघ्र असर दिखने लगता है।इसका कारण यह है कि सभी दिशाएंपढ़नापढ़ना जारी रखें “वास्तु दोष निवारण कैसे करें”
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मृत्यु के 14 प्रकार
राम-रावण युद्ध चल रहा था, तब अंगद ने रावण से कहा:- तू तो मरा हुआ है, मरे हुए को मारने से क्या फायदा ?रावण बोला:– मैं जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे ?अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वालों को जीवित नहीं कहते साँस तो लुहार की धौंकनी भी लेती है। तब अंगद ने मृत्यु के 14पढ़नापढ़ना जारी रखें “मृत्यु के 14 प्रकार”
सप्त नद्याः
ऋग्वेद की नदीस्तुति में 7 नदियों का वर्णन मिलता है : सिन्धु, सरस्वती, वितस्ता (झेलम), शुतुद्रि (सतलुज), विपाशा (व्यास), परुषिणी (रावी) और अस्किनी (चेनाब) यह सब नदियां हिमालय खंड से निकलती है , (सरस्वती को छोड़ कर जो अब नहीं है ) सतलुज व्यास रावी और चिनाब हिमाचल प्रदेश से होकर जाती है। ऋग्वेद मेंपढ़नापढ़ना जारी रखें “सप्त नद्याः”
अंगों और तिल का प्रभाव
शरीर के विभिन्न अंगों पर तिलों का फलभारतीय ज्योतिष में सामुद्रिक शास्त्र में शरीर के विभिन्न अंगों पर पाए जाने वाले तिलों का सामान्य फल इस प्रकार है। १- ललाट पर तिल – ललाट के मध्य भाग में तिल निर्मल प्रेम की निशानी है। ललाट के दाहिने तरफ का तिल किसी विषय विशेष में निपुणता,पढ़नापढ़ना जारी रखें “अंगों और तिल का प्रभाव”
गरुण वृक्ष की विशेषता
प्रकृति ने हमे कई उपहार दिए हैं उनमें से एक गरुड़ वृक्ष भी हैं…. गरुड़ की फलियाँ बिलकुल साँप के आकर के दिखाई देती हैं,शायद इसी कारण इसका नाम गरुड़ पड़ा होगा… ग्रामीणांचल में आज भी दरवाजे के ऊपर गरुड़ की फलियों को बांध देते है ताकि किसी भी प्रकार का साँप घर में नहींपढ़नापढ़ना जारी रखें “गरुण वृक्ष की विशेषता”
तीज व्रत विशेष
हरितालिका तीज (गौरी तृतीया) व्रत—- हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं। कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा गयापढ़नापढ़ना जारी रखें “तीज व्रत विशेष”
आवस्यक जानकारी
विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियों द्वारा किया गया अनुसंधान) ■ काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग■ 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग■ 2 त्रुटि = 1 लव ,■ 1 लव = 1 क्षण■ 30 क्षण = 1 विपल ,■ 60 विपल = 1 पल■ 60 पलपढ़नापढ़ना जारी रखें “आवस्यक जानकारी”
शालग्राम का रहस्य
भगवान विष्णु का पाषाणरूप है शालग्राम!!!!!!! जहां शालग्राम शिला रहती है वहां भगवान श्रीहरि व लक्ष्मीजी के साथ सभी तीर्थ निवास करते हैं हिमालय पर्वत के मध्यभाग में शालग्राम-पर्वत (मुक्तिनाथ) है, यहां भगवान विष्णु के गण्डस्थल से गण्डकी नदी निकलती है, वहां से निकलने वाले पत्थर को शालग्राम कहते हैं । वहां रहने वाले कीड़ेपढ़नापढ़ना जारी रखें “शालग्राम का रहस्य”
पित्रि दोष रहस्य
पितृ दोष भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य इस सौर मंडल काराजा है और इससे पिता की स्थिति का अवलोकन कियाजाता है। शनि सूर्य का पुत्र है, परन्तु सूर्य का परम शत्रु है।शनि वायु विकार का कारक ग्रह है। राहु का फल भी शनिके समान ही है। सूर्य आत्मा का कारक है इसलिए जब सूर्यजन्म पत्रिकापढ़नापढ़ना जारी रखें “पित्रि दोष रहस्य”
सर्व गायत्रीमन्त्राः
145 देवो के गायत्री मंत्र………..1 सूर्य ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥2 ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात् ॥3 ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥4 ॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥5 ॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्न आदित्यः प्रचोदयात् ॥6 ॐपढ़नापढ़ना जारी रखें “सर्व गायत्रीमन्त्राः”