हर शुभ कार्य से पहले क्यों बनाया जाता है स्वास्तिक? जानिए इसका कारण और रहस्य… स्वास्तिक को प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में अच्छाई और शुभता का प्रतीक माना जाता रहा है। हिन्दू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले स्वास्तिक का चिन्ह जरूर बनाया जाता है। स्वस्तिक शब्द सु+अस+क शब्दों सेपढ़नापढ़ना जारी रखें “स्वस्तिक का महत्व”
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वास्तु दोष निवारण कैसे करें
जानिए की किस मन्त्र के जाप से किस दिशा का होगा वास्तु दोष( प्रभाव )दूर या कम〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰आजकल शायद ही कोई ऐसा घर हो जो वास्तु दोष से मुक्त हो। वास्तु दोष का प्रभाव कई बार देर से होता है तो कई बार इसका प्रभाव शीघ्र असर दिखने लगता है।इसका कारण यह है कि सभी दिशाएंपढ़नापढ़ना जारी रखें “वास्तु दोष निवारण कैसे करें”
मृत्यु के 14 प्रकार
राम-रावण युद्ध चल रहा था, तब अंगद ने रावण से कहा:- तू तो मरा हुआ है, मरे हुए को मारने से क्या फायदा ?रावण बोला:– मैं जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे ?अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वालों को जीवित नहीं कहते साँस तो लुहार की धौंकनी भी लेती है। तब अंगद ने मृत्यु के 14पढ़नापढ़ना जारी रखें “मृत्यु के 14 प्रकार”
सप्त नद्याः
ऋग्वेद की नदीस्तुति में 7 नदियों का वर्णन मिलता है : सिन्धु, सरस्वती, वितस्ता (झेलम), शुतुद्रि (सतलुज), विपाशा (व्यास), परुषिणी (रावी) और अस्किनी (चेनाब) यह सब नदियां हिमालय खंड से निकलती है , (सरस्वती को छोड़ कर जो अब नहीं है ) सतलुज व्यास रावी और चिनाब हिमाचल प्रदेश से होकर जाती है। ऋग्वेद मेंपढ़नापढ़ना जारी रखें “सप्त नद्याः”
अंगों और तिल का प्रभाव
शरीर के विभिन्न अंगों पर तिलों का फलभारतीय ज्योतिष में सामुद्रिक शास्त्र में शरीर के विभिन्न अंगों पर पाए जाने वाले तिलों का सामान्य फल इस प्रकार है। १- ललाट पर तिल – ललाट के मध्य भाग में तिल निर्मल प्रेम की निशानी है। ललाट के दाहिने तरफ का तिल किसी विषय विशेष में निपुणता,पढ़नापढ़ना जारी रखें “अंगों और तिल का प्रभाव”