मृत्यु कोई शब्द नही बल्कि, हिन्दू धर्म के महाभारत ग्रन्थ के अनुसार, मृत्यु एक परम पवित्र मंगलकारी देवी है। सामान्य भाषा मे किसी भी जीवात्मा अर्थात प्राणी के जीवन के अन्त को मृत्यु कहते हैं। मृत्यु सामान्यतः वृद्धावस्था, लालच, मोह,रोग,, कुपोषण के परिणामस्वरूप होती है। मुख्यतया मृत्यु के 101 स्वरूप होते है, लेकिन मुख्य 8 प्रकार की होती है। जिसमे बुढ़ापा,पढ़नापढ़ना जारी रखें “मृत्यु सबको आती है”
Monthly Archives: मार्च 2020
कोरोना के कहर से क्या आप बचे हैं ?
नमस्कार! बांधुवों आज पूरा विश्व एक ऐसी महामारी से जूझ रहा है जिसका अब तक कोई समुचित इलाज नहीं है। अमेरिका , चीन , इटली, स्पेन और विश्व के लगभग सभी छोटे बड़े देश इस महामारी से त्रस्त हैं। हमारा भारत भी अछूता नहीं रहा इस महामारी से ।जैसा कि हमने आपसे पहले भी चर्चापढ़नापढ़ना जारी रखें “कोरोना के कहर से क्या आप बचे हैं ?”
क्या हम कुछ प्रश्न स्वयं से कर सकते हैं?
नकारात्मक प्रभावों के खिलाफ, चाहे आपके स्वयं के बनाए हुए हों ,या आपके आस पास नकारात्मक लोगों की गतिविधियों के परिणाम हों , अपने आप को बचाने के लिए पहचानें कि आप के पास एक इच्छा शक्ति है, इसका तब तक प्रयोग करें, जब तक यह आपके मस्तिष्क में प्रतिरोधक क्षमता की एक दीवार नपढ़नापढ़ना जारी रखें “क्या हम कुछ प्रश्न स्वयं से कर सकते हैं?”
क्या हम जो चाहेंगे वो मिलेगा?
नमस्कार! हमारे मन में बहुत सी इक्षाएं रहती हैं और हम उन्हें पाने के लिए लालायित रहते हैं। परन्तु क्या सब मिल पाता है? अयिए! समझते हैं। एक चुंबक लें! आप उसे लकड़ी के पास ले जाएं। क्या लकड़ी चुंबक की ओर आकर्षित होगी ? नहीं… तांबा, रबर पर भी उसका प्रभाव नही होगा। अबपढ़नापढ़ना जारी रखें “क्या हम जो चाहेंगे वो मिलेगा?”
क्या हमें अपनी क्षमता पता है?
एक बहुत ही रोचक कहानी आपको बताता हूं । किसी जंगल में एक शेर का जोड़ा था। समय आने पर शेरनी ने एक बच्चा जन्मा । यह बहुत छोटा था।एक दिन उसके मा बाप शिकार पर गए थे। आने में देर हो गई। वह बच्चा भूख से तड़पने लगा । खाने की तलाश में वहपढ़नापढ़ना जारी रखें “क्या हमें अपनी क्षमता पता है?”
मै सफल क्यों नहीं ?
बहुत से मनुष्य अपने जीवन में योग्य होते हैं। योग्यता के बावजूद वे अपने पूरे जीवन में बहुत थोड़ा काम कर पाते हैं। इसका मतलब यह है कि वे अपनी योग्यता के अभिमान में आकर कई क्षेत्रों में काम करना शुरू कर देते हैं अथवा निराशावादी हो जाते हैं। वे अपने ही काम में कमीपढ़नापढ़ना जारी रखें “मै सफल क्यों नहीं ?”
प्रसन्न रहूं या निराश ?
वह मनुष्य जो सदा प्रसन्न रहता है, बड़े से बड़े संकट में भी जिसके चेहरे की प्रसन्नता कम नहीं होती, वास्तव में वही सुखी और सफल है। उस इस बात का पूरा विश्वास है कि यह जो संकट आया है वह क्षणिक है। तुरंत चला जाएगा। इसलिए वह प्रसन्न मुख से, मन से उस संकटपढ़नापढ़ना जारी रखें “प्रसन्न रहूं या निराश ?”
“कोरोना” कब तक – जानिए ज्योतिष क्या कहता है
नमस्कार ! आज भारत समेत समूचा विश्व विषाक्त महामारी “कोरोना” से पीड़ित है और इसकी अब तक कोई दवा नहीं बन पाई है अतः बहुत ही गंभीर विषय है । आयिए समझते हैं ज्योतिष विज्ञान क्या कहता है इस संबंध में। ज्योतिष की दृष्टि से देखने पर यह रोग 26 दिसम्बर 2019 से 19 जुलाईपढ़नापढ़ना जारी रखें ““कोरोना” कब तक – जानिए ज्योतिष क्या कहता है”
क्या चिंता करना ठीक है?
भविष्य अनिश्चित है, डरावना है, छिपा हुआ है । अगर हम समय-समय पर चीजों के बारे में चिंता ना करें तो हम इंसान नहीं हैं । हम अपनी सेहत अपने माता-पिता या बच्चों या दोस्तों, अपने संबंधों, अपने कामकाज और अपने खर्च के बारे में चिंता करते हैं। हम चिंता करते हैं कि हम ज्यादापढ़नापढ़ना जारी रखें “क्या चिंता करना ठीक है?”